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Delhi · Amar Ujala

एक जैसे नियम नहीं, साझा लोकतांत्रिक मानक जरूरी: विजेंद्र गुप्ता

27 Oct 2026, 1:04 am

एक जैसे नियम नहीं, साझा लोकतांत्रिक मानक जरूरी: विजेंद्र गुप्ता
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एक जैसे नियम नहीं, साझा लोकतांत्रिक मानक जरूरी: विजेंद्र गुप्ता

Tue, 27 Oct 2026 06:34 PM IST


अमर उजाला ब्यूरो

Amar Ujala Bureau



अमर उजाला ब्यूरो

Updated Tue, 27 Oct 2026 06:34 PM IST

-विधानसभा की कार्यवाही के लिए साल में 30 बैठकें कराने, विधेयकों की गहन जांच-डिजिटल नोटिस को औपचारिक मान्यता देने का सुझाव

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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने विधायी संस्थाओं के कामकाज में एकरूपता लाने के लिए साझा लोकतांत्रिक मानकों के साथ राज्यों की सांविधानिक स्वायत्तता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने नियमों को लैंगिक रूप से तटस्थ बनाने और विधानसभा की प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने की सिफारिश की। उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभिन्न राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने विधायी संस्थाओं की कार्यप्रणाली के लिए मॉडल नियम तैयार करने की पहल में दिल्ली के सुझाव रखे। मंगलवार को आयोजित समिति की बैठक में उन्होंने कहा कि एकरूपता का अर्थ सभी विधानसभाओं के लिए एक जैसे नियम बनाना नहीं है। दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विशिष्ट संवैधानिक व्यवस्थाओं को मॉडल नियमों में उचित स्थान मिलना चाहिए। गुप्ता ने कहा कि संसदीय नियमों में पुरुषवाचक शब्दों के स्थान पर लैंगिक रूप से तटस्थ भाषा अपनाई जानी चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी और सम्मान प्रतिबिंबित हो। उन्होंने सभी राज्य विधानसभाओं में बजट, मानसून और शीतकालीन सत्र आयोजित करने तथा साल में कम से कम 30 बैठकें सुनिश्चित करने का सुझाव दिया। साथ ही, ई-विधान और डिजिटल संसद जैसी पहलों के तहत इलेक्ट्रॉनिक नोटिस, समन और याचिकाओं को औपचारिक मान्यता देने की वकालत की।

विधायी कामकाज की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उन्होंने विधेयकों के साथ वित्तीय, प्रशासनिक और कानूनी जानकारी उपलब्ध कराने तथा जरूरी मामलों में उन्हें चयन समिति या विभागीय स्थायी समिति के पास भेजने का सुझाव दिया। इससे विधेयकों की विशेषज्ञों से जांच और जनता की राय लेने का अवसर मिल सकेगा। गुप्ता ने सदन की कार्यवाही में अध्यक्ष को अधिक प्रक्रियागत स्वतंत्रता देने, नियमों की अस्पष्टता दूर करने और संसदीय विशेषाधिकारों से जुड़े प्रावधानों पर पुनर्विचार की जरूरत भी बताई।

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कागज बचाने की पहल

बैठक में 1,521 पृष्ठों वाले दस्तावेजों के 12 सेट डिजिटल रूप में साझा किए गए। इससे अनुमानित 18,252 कागज बचाए गए। सचिवालय के मुताबिक, यह करीब 4.4 पेड़ों और 18,252 लीटर पानी की बचत के बराबर है। इससे लगभग 182.5 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन में कमी का अनुमान है।

Source: Amar Ujala

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